रोते रोते आये थे

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रोते रोते आये थे

रोते रोते आये थे
आँसू बहा कर चल दिये,
गोया जैसे आये थे वैसे
ही आ कर चल दिये।

कई आकर आने जाने का
झगड़ा मिटा के चल दिये,
कई जा के फिर आये गये
आये फिर आकर चल दिये।
कई घाटा पूरा करके भी
नफा कमा के चल दिये, कई ।

पेछली पुण्य पूंजी भी
अपनी लुटा के चल दिये।
यों तो जहाँ में लाखों ही
आये व आके चल दिये।

हंसते गये जो ‘नत्थासिंह’
जग रो रहा उन्हें,
जो रोते गये अपनी वह
हंसी करा के चल दिये।