ऋषियों की सन्तान तुम्हारा
ऋषियों की सन्तान तुम्हारा
मिल गया जो सामान तुम्हारा
रखो उसे संभालकर।। टेक ।।
स्वर्गभूमि को नर्क बना
मुश्किल से छोड़कर नंग गये
दीवार तोड़ और फर्श फोड़कर
घर का खोकर ढंग गये
धन माया लेकर संग गये
कर टुकड़ों से भी तंग गये
बेईमानी छोड़ मति मन्द गये
जो फैलाकर दुर्गन्ध गये
उसे फेंको बाहर निकालकर ।।1।।
पंचायतों में न्याय होवे
तो शहर में कौवे बोलेंगे
वकील मोहर्रिर मजिस्ट्रेट
सब घास खोदते डोलेंगे
या और कोई काम टटोलेंगे
या किसी के डांगर खोलेंगे
इन्हें पकड़कर ले जाना
फिर अच्छी तरह से समझाना
जेलों के अन्दर डालकर ।।2।।
चकबन्दी करो आज किसानो
जीवन में खुशहाली हो
वही रहट ट्यूबवैल तुम्हारा
ढोर चरें वही पाली हो
सब खेतों की रखवाली
फिर देखें क्यों कंगाली हो
वही पत्नी चरखा फेरगी,
बुढ़िया मां उसको टेरेगी
इस घर को मालामाल कर।।3।।
फूट बीमारी छोड़ो प्रेम का
घर-घर में प्रचार करो
छुआछूत को छोड़ो
प्रेमी परिवारों से प्यार करो
यहां विद्या का प्रसार करो
अब गिनती बेशुमार करो
प्रतापसिंह से वीरों की
अब अर्जुन से रणधीरों की
फिर अमरीका ससुराल करो।।4।।










