ऋषिवर देव दयानन्द की पद्धति हमें सिखलानी है।
ऋषिवर देव दयानन्द की
पद्धति हमें सिखलानी है।
पंच महायज्ञों की महिमा
घर-घर में पहुँचानी है।
पंच महायज्ञों की महिमा, घर-घर…….
प्रातः सायं सन्ध्या
और स्वाध्याय वेद बतलाता है।
यह है पहला महायज्ञ
जो ब्रह्मयज्ञ कहलाता है।
आत्म चिन्तन प्रभु मिलन की,
विधि अत्यन्त पुरानी है।
पंच महायज्ञों की महिमा, घर-घर…..(1)
देव यज्ञ है अग्निहोत्र
और महायज्ञ यह दूजा है।
इसी से होती समस्त जड़ चेतन
देवों की सच्ची पूजा है।
नित्य नियम से किया करो,
यदि काया स्वस्थ बनानी है।
पंच महायज्ञों की महिमा, घर-घर…….. (2)
जीवित मात-पिता की
सेवा करना जो फरमाया है।
यही तीसरा महायज्ञ है,
पितृ यज्ञ कहलाया है।
नर नारी अबाल वृद्ध को
बात यही समझानी है।
पंच महायज्ञों की महिमा, घर-घर…….(3)
महायज्ञ बलिवैश्वदेव को
चौथा यज्ञ समझ लेना।
पका अन्न पहले अग्नि
और जीव-जन्तुओं को देना।
फिर आपस में बाँट कर खाना,
प्रीत की रीत निभानी है।
पंच महायज्ञों की महिमा, घर-घर……. (4)
‘पथिक’ पाँचवें महायज्ञ
को अतिथियज्ञ कहते सारे।
संन्यासी विद्वानों की,
घर पर सेवा करना प्यारे।
जहाँ पे पाँचों महायज्ञ हों,
वह घर स्वर्ग निशानी है।
पंच महायज्ञों की महिमा, घर-घर……(5)










