ऋषि जी के आने से देश का सुधार हो गया।

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ऋषि जी के आने से देश का सुधार हो गया।

ऋषि जी के आने से
देश का सुधार हो गया।
धूर्त पाखण्डियों की
पोल का साक्षात्कार हो गया।।1।।

अठारह पुराण रचाकर
इन्होंने देश को भरमाया,
अपना स्वार्थ सिद्ध करने को
रास्ता यह अपनाया, स्त्री,
शूद्रों को वेद पढ़ने का नहीं
अधिकार बताया,
जिसने गायत्री भी सुन लिया

कानों में शीशा डलवाया,
ऋषिजी ने आकर वेदों का
सच्चा अर्थ सुनाया, सूर्य,
चन्द्रमा, पृथ्वी, वायु
वैसे ही वेद सबका बताया,
आज सब वर्ण के स्वों
पुरुषों को सब विद्या पढ़ने का
अधिकार हो गया।
ऋषिजी के आने से देश का सुधार हो गया… (2)

जाति जन्म से मानी इन्होंने,
देश बाग से विरान हो गया,
योग्य पुरुष की उन्नति रुकी,
अयोग्य का सम्मान हो गया,
पुरुषार्थ को धक्का लगा,
अकर्मण्यता का ही सबको
ध्यान हो गया,

मूर्ख समझे जाने लगे विद्वान्,
पथ सुदर्शन में व्यवधान हो गया
अविद्या से बढ़ गया अन्धकार,
वेद ज्ञान प्रायः लुप्त समान हो गया,

देश-धर्म के प्रति,
कर्त्तव्य के स्थान पर,
स्वार्थ ही प्रधान हो गया गुण,
कर्म, स्वभाव से होती है
जाति बतलाया, ऋषि ने
सबकी उन्नति का खुला द्वार हो गया
ऋषिजी के आने से देश का सुधार हो गया … (3)

कितने ही बुरे कर्म करो,
राम के नाम मात्र से सब माफ होते हैं।
सब किये अन्याय बलात्कार
एक गंगा स्नान से ही साफ होते हैं
कितने ही झूठे झगड़े करो,
एक व्रत रखने से ही माफ होते हैं,

पत्थर पूजक, तिलकधारी पर
ईश्वर कभी नहीं खौफ होते हैं,
ऋषिजी ने वेदों से बतलाया सन्ध्या,
हवन योग ही सच्चे जाप होते हैं,
किये कर्मों का फल भुगतना पड़ेगा,
नहीं कभी भी माफ होते हैं,

तब आया सज्ञान सद्विचार
सत्य सनातनवैदिक धर्म का
प्रचार हो गया
ऋषिजी के आने से देश का
सुधार हो गया… (4)

अपने-अपने स्वार्थ वश,
ईश्वर की दुर्दशा कर डाली
कोई कहे राम हैं,
कोई कहे कृष्ण है खाली,
कोई शंकर को ईश्वर कहे,
कोई हनुमान, भैरव, दुर्गा,
काली एक ‘ओ३म् ‘
सर्वशक्तिमान बताया,

जो सृष्टिकर्ता और रखवाली,
सब मत-मतान्तर नष्ट हुए,
जो फैलाये गये झूठे जाली,
वैदिक ज्ञान उदय हुआ,

जिसमें ईश्वर प्राप्ति की
सच्ची प्रणाली,
इन बातों का रखो ख्याल,
जिससे बने तुम्हारा जीवन’ खुशहाल’,
नहीं तो समझो मनुष्य
जीवन बेकार हो गया..
ऋषिजी के आने से देश का सुधार हो गया …… (5)

ऋषि दयानन्द स्वराज्य के सर्वप्रथम संदेशवाहक तथा मानवता के उपासक थे” – बाल गंगाधर तिलक