रंग रैली मन रही हैं

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रंग रैली मन रही हैं (धुन-चूड़ी मजा ना देगी)

रंग रैली मन रही हैं
घर को उजाड़ करके,
दर्पण दिखा रहे हैं
सूरत बिगाड़ करके।

नादिर चंगेज, हलाकू,
आये अनेकों डाकू
सब मात कर दिये हैं
लेकर इन्होंने चाकू।
तन क्रूरता से काटा
आंतो को फाड़ करके ।।1

स्वार्थ में ऐसे भागे,
सब नियम धर्म त्यागे,
बेशर्मी से इन्होने,
सारी दुनियां के आगे,
नंगी कर दई है माँ को
उघाड़ करके ।। 2 ।।

बन करके उन्मादी,
उन्माद को हवा दी,
सदियों ना बुझेगी,
यह आग जो लगा दी।
भयभीत कर दिये सब
तिनके का ताड़ करके ।।3।।

निर्दोषों को सता कर,
आतंक यह फैला कर,
क्या करना चाह रहे हो
‘प्रेमी’ ने पूछा जाकर,
सुन करके हँस दिये वो
नीचे को नाड़ करके ।।4।।