रखवाले। जमाने से है न्यारा

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अपरम्पार माया

(तर्ज – फिरकी वाली तू कल फिर आना)

रखवाले। जमाने से है न्यारा
जो प्राणों से भी प्यारा
तू सच्चा करतार है।
तेरी माया प्रभु अपरम्पार है।

सारे दुःखों को हर लेने वाला
सुखों को देने वाला
तू सब का आधार है।
तेरी माया प्रभु अपरम्पार है।
रखवाले! ज़माने से है न्यारा…..

१. तूने ही सारे संसार को रचा है
तू पिता तू माता है।
लेने वाले तो हैं जहान में
करोड़ों तू ही सबका दाता है।
पालनहारा ! सब का स्वामी
घट घट अन्तर्यामी।
रखवाले ! ज़माने से है न्यारा…………

२. वेदों ने गाई प्रभु महिमा
तुम्हारी तेरी सब को टेक है।
न ही तू दूसरा न तीसरा
न पाँचवाँ एक है तू एक है।
महिमा गाते हैं संन्यासी योगी योगाभ्यासी।
रखवाले ! ज़माने से है न्यारा…….

३. तू ही जहाँ में सब प्राणियों के
पास है दूर से भी दूर है।
सारे सितारों के नज़ारों में
चमकता एक तेरा नूर है।
तू है दाता तू भण्डारी
भिक्षुक दुनियाँ सारी।
रखवाले! ज़माने से है न्यारा……….

४. ओन पड़े हैं प्रभु आप की शरण में’
पथिक’ दुनियाँ छोड़कर।
और किसी की हम चाहना करें
क्यों तुमसे नाता जोड़ कर।
संकट होवे दूर हमारा पा कर प्यार तुम्हारा।
रखवाले ! ज़माने से है न्यारा…………