रक्षा बन्धन के दिन एक फौजी सोचता है

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रक्षा बन्धन के दिन एक फौजी सोचता है

तर्ज – पंण्डित जी मेरे मरने के बाद……

रक्षा बन्धन के दिन एक फौजी सोचता है
कि तेरी बहन तो तुझसे बहुत दूर है
और तुझको कल सीमा पर जाना है,
तू आज घर भी नहीं जा सकता।

तो अचानक उसकी एक
देवी पर नजर पड़ी,
फौजा बोला बहन मुझको
आज अपना भाई मात्र ले
और मझे राखी बांध दे,
उस बहन ने राखी बांधी
और ये फौजी भाई उसे
कुछ दक्षिणा देने लगा,
तो बहन क्या कहती है?

बहन कहा है रे जब तूनें,
रिश्ता अब ये निभा देना।
रण भूमी में जाके रे भैया,
लाशों पे लाश बिछा देना।।

छुट्टी जब आयेगा रे तू,
मेरे घर मिलने आना-2
राखी की वहाँ लूंगी दक्षिणा,
पर पहले ‘सचिन’ पता देना
बहन कहा है……..

हिम्मत रखना मेरे वीरा,
पीछे ना तू हट जाना-2
बहन दुआ देगी ये तेरी,
जाके छक्के छुड़ा देना
बहन कहा है………

हमला करना ना पीछे से,
वार सभी हो सामने के-2
जाये वार ना कोई खाली,
गर्दन धड़ से उड़ा देना
बहन कहा है………

चुन-चुन के दुश्मन को मारना,
लाशों से ना घबराना-2
राखी का है ये ही बदला,
जाके जोश दिखा देना
बहन कहा है………