रघुपति राघव राजा राम राम

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रघुपति राघव राजा राम राम (धुन-मैंने जीना सीख लिया)

रघुपति राघव राजा राम राम
पता ना पावें सीता राम
तेरा मेरा सब बेकार,
ताकत करती बेड़ा पार।
उठते की पूजा दिन रात
गिरते को सब मारे लात ।।

जो अकड़े उसे पटक लगा,
कुर्सी के ऊपर चढ़ जा।
क्या चिन्ता करता है यार,
लोक लाज को गोली मार ।।

जैसे भी हो काम बनाले
छल से बल से देकर दाम ।।1।।

मोटर गाड़ी तांगा रेल दूरियां
में पैसे का खेल।
बोली पर लगता हर माल
धनी सुखी है दुखी कंगाल ।
सबसे रख पैसे की प्रीत चोर
बाजारी करले मीत ।।
दुनियां भर की जेब काट कर
बटुओं को भर आठों याम।।2।।

सन्तों के बच्चा यह बोल,
मानव जन्म बड़ा अनमोल ।
मेहनत करना है बेकार तान
चादरा सो जा यार ।।

दाल मूंग की तज मदहोश
खाले प्यारे रोगन जोश।
जब तक जी तबियत से
जी नकद नहीं कर्जे की पी ।।
उल्टी सीधी अपनी हांक
ओरों के मत सुने कलाम ।।3।।

नियम पुराने सारे छोड़ धर्मों
के बन्धन को तोड़।
सम्पादक से हाथ मिला
पिक्चर ले जा खिला पिला ।।

कूड़ा करकट छपने दें
सबको सदा कलपने दे।
नाम कमां और चांदी कूट
ढ़ोंग बनाकर करले लूट ।।
शोभाराम प्रेमी की मत सुन
जैसे भी हो सिद्ध कर काम ।।4।।