रजा मेरी यही मालिक,
कि दिल की बात हो जाये
तड़फता फिर रहा हूँ मैं,
जरा मुलाकात हो जाये
उजाला जिन्दगी का तो
अभी चहुँ ओर फैला है
जरा सा देख लूँ तुझको,
नहीं फिर रात हो जाये
विषय के चक्रव्यूह में मैं
दिनों दिन फँस रहा हूँ मैं
जरा हिम्मत दिला देना,
नहीं फिर मात हो जाये
नहीं ताकत बची मुझ में,
करूँ विश्वास मैं जग का
गोद अपनी में भर लेना,
नहीं फिर रात/घात हो जाये
तरसती खुश्क आँखों में
कभी आँसूं नहीं आते
जरा सा प्रेम मिल जाये
तो “हित” बरसात हो जाये
रजा मेरी यही मालिक,
कि दिल की बात हो जाये
तड़फता फिर रहा हूँ मैं,
जरा मुलाकात हो जाये










