पुष्प वैदिक वाटिका के खिल गये
पुष्प वैदिक वाटिका के खिल गये
देश को स्वामी दयानन्द मिल गये ।।
चल पड़े सुख-सम्पदा को
छोड़ कर सत्य वक्ताओं
में हो शामिल गये ।।
तर्क की तलवार ली जब
हाथ में मिथ्या मत पन्थों
के शासन हिल गये।।
श्रद्धानन्द निर्भीक त्यागी
हंसराज देश पर मिटने
को दे बिस्मिल गये।।
जहर दे कर के किया
स्वागत तेरा प्यारे ऋषिवर
पार कर मंजिल गये ।।
विष पिया अमृत पिलाया
देश को जीत कर के हर
किसी का दिल गये।।
रक्त से सींची थी वैदिक
वाटिका आर्यों की सेना
सजाकर चल दिये।।










