‘प्रेमी’ ऐसे लोगों ऊपर कैसे करें विश्वास ।
‘प्रेमी’ ऐसे लोगों ऊपर,
कैसे करें विश्वास ।
जो गंगा गये तो गंगा राम,
जमना गये तो जमना दास ।।
जहां से निकले मतलब इनका,
वहीं पर डेरे डालें,
जग वाले न समझ सकें
इनकी शतरंजी चालें।
तन के उजले मन के काले,
करें कोम का नाश ।। 1 ।।
जिधर हवा ने रुख फेरा,
मुंह उधर इन्होंने फेरे,
गिरगिट जैसा रंग
बदलते रहते शाम सवेरे।
फिरें लुढ़कते बहुतेरे,
मन की दृढ़ता नहीं पास ।। 2।।
कभी इन्हें नहीं रूकते देखा,
किंसी जबर के आगे,
पड़ी जो सर पर दाब जरा सी,
पीठ दिखा कर भागे,
अमृतसर को छोड़ के लागे,
सीधी राह मद्रास ।। 3।।
जिनको अपने ही ऊपर,
कभी नहीं भरोसा होता,
तोड़ के अपनी मर्यादा को,
करें गलत समझौता।
ऐसे वक्ता और श्रोता,
गन्दा कर रहे इतिहास ।। 4।।










