प्रेम भाव से मिलकर जग में रहें सभी इनसान ।
(तर्ज – देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान्)
प्रेम भाव से मिलकर जग में रहें सभी इनसान ।
इतनी दया करो भगवान् ।
सब के सब हों सुखी जगत् में हो सबका कल्याण ।
इतनी दया करो भगवान् ।
१. कहीं अन्धेरा कहीं उजाला।
तेरा है हर काम निराला।
सबको रचकर सबको पाला।
तू ही है सबका रखवाला।
तेरे जैसा हुआ न कोई जग में और महान् ।
इतनी दया करो भगवान् ।
२. सबका मालिक सबका स्वामी।
घट घट वासी अन्तर्यामी ।
सृष्टि कर्त्ता धर्त्ता हर्त्ता है तेरी पहचान ।
इतनी दया करो भगवान् ।
३. जो भी तेरे दर पर आया।
मन बुद्धि और शीश झुकाया।
करुणा का अमृत बरसाया।
मानव जीवन सफल बनाया।
हमें भी तेरे भक्ति भजन का मिले
अमर वरदान ।
इतनी दया करो भगवान् ।
४. सब आशायें पूरी कर दो।
ख़ाली मन की झोली भर दो।
हाथ दया का सर पर धर दो।
सबके सारे संकट हर दो।
अन्त समय तक ‘पथिक’
तुम्हारा करें सभी गुणगान ।
इतनी दया करो भगवान् ।










