प्रीत प्रभुनाल बन्दे आ लगाईयाँ न गइयाँ।

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प्रीत प्रभुनाल बन्दे आ लगाईयाँ न गइयाँ।

प्रीत प्रभुनाल बन्दे आ
लगाईयाँ न गइयाँ।
तेरे मन विचों मूर्खा
बुराईयाँ न गइयाँ।।

आके दुनियाँ ते प्रभु
ताई क्यों भूल वे !
हीरा जिन्दड़ी निमाणी
तेरी गई रूल वे।
तेरे मन विचों भैडेया
अदाईयाँ न गड्याँ।।

तेरे अन्दर अंधेरा उठ
जाग बन्दे-आ।
सन्ध लाई पंजा चौरां
तेरा घर लुटया।
तेयो ज्ञान दीयाँ बत्तियाँ
जलाईयाँ न गईयाँ।।

छड नेकियाँ बदि दे
पिछों लगदा रहेयों।
नाल दंगे ते फरेब
दुनियाँ ठगदा रहेयों।
हाय पाप दियाँ वृत्तियाँ
हटाईयाँ न गईयाँ।।