प्रीत की रीत सिखा दो

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प्रीत की रीत

प्रीत की रीत सिखा दो
भगवान् भगत को।
यह मन मेरा बगुला कहिए
बिन हंसों मोती कित्थो लईये।
मन को हंस बना दो।

मोह माया ने डाला फंदा,
मन शरीर सब हो गया गंदा।
निर्मल बुद्धि बना दो।

भक्तों के प्रभु आप हितकारी,
डूबती नैया पार उतारी।
हम को पार लगा दो।

तेरी भक्ति में है शक्ति
बिन शक्ति के फीकी लगती।
दोनो साथ मिला दो।

प्रभु जी लीजिये चरन
मोक्ष मार्ग बतला दो।
माहि और कोई भी
अब रस्ता नाहिं।

जग में दो दिन रैन बसेरा
कोई नहीं है यहां पर तेरा।
‘आर्य’ सब को सुना दो।