प्राणों से भी बढ़कर प्यारा
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश हमारा।
मोह महातम हरने वाला,
ज्ञान उजाला करने वाला।
भव्य-भावना भरने वाला,
दिव्य ज्योति का स्त्रोत हमारा।। है०
वैदिक पाठ पढ़ाने वाला,
गौरव गुण गाने वाला।
फिर से सतयुग लाने वाला,
दयानन्द ऋषि का चखतारा ।। है०
शुभ सन्मार्ग सुझाया इसने,
बुद्धिवाद उमगाया इसने।
गुरुडम का गढ़ ढाया इसने,
जग में निर्भयभाव प्रचारा।। है०
सोता देश जगाया इसने,
प्रेम-प्रवाह बहाया इसने ।
स्वावलम्ब सिखलाया इसने,
इसने सत्य धर्म विस्तारा।। है०
कोटि-कोटि जनता का जीवन,
अर्पित है इस पर समोदमन।
त्यागी सुधी, साधुओं का धन,
मानवता का सबल सहारा।। है०
वैदिक धर्म ध्वजा फहरावें,
बलिवेदी पर शीश चढ़ावें।
मरते-मरते गाते जावें,
अजर अमर अक्षय ध्रुवतारा ।। है०
विशेष –
सत्यार्थ प्रकाश में ३७७
ग्रंथों का हवाला है।
१५४२ वेद मंत्रों तथा
श्लोको का उद्धरण है।
सत्यार्थ प्रकाश को स्
वामी दयानन्द जी
साढ़े ३ महीने में
लिखकर तैयार किये।
कालमार्क्स ने ३४
वर्ष इंग्लैण्ड में बैठकर
‘डास कैफिटले’ ग्रंथ लिखा था।
जिसने विश्व में नवीन आर्थिक
दृष्टि को जन्म दिया ,
किन्तु ऋषि दयानंद ने
सत्यार्थ प्रकाश साढ़े
तीन माह में लिखा था,
जिसने नवीन समाजिक
दृष्टिकोण को जन्म दिया।
दुनिया सारी घूम ली,
कहीं पाया नहीं प्रकाश
दूर हुआ अंधेरा तब,
जब पढ़ा सत्यार्थ प्रकाश।
मैंने सत्यार्थप्रकाश को
कम से कम १८ बार पढ़ा।
जितनी बार मैं उसको पढ़ता
हूँ मुझे मन और आत्मा के
लिए कुछ नवीन भोजन मिलता है।
पुस्तक गूढ़ सच्चाइयों से भरी पड़ी है।










