अथ प्राणायाम मन्त्रः
ओं भूः। ओं भुवः ।
ओं स्वः। ओं महः।
ओं जनः । ओं तपः।
ओं सत्यम् ।।४।।
तैति० प्रपा० १०। अनु० २७
प्राण स्वरूप प्राणों से प्यारे,
दुःख दूर सब करने हारे।
सर्व-व्यापक आनन्द दाता,
सबसे बड़े जगत पितु माता ।।
दुष्टों को दण्ड देने हारे,
सब की ही सुध लेने हारे।
सत्य स्वरूप दया सागर हो,
अविनाशी तुम अजर अमर हो।।










