प्रभु तेरी भक्ति का वर मांगते हैं।
प्रभु तेरी भक्ति का
वर मांगते हैं।
झुके तेरे दर पे वो
सर मांगते हैं।।
बुरे भाव से जो न
देखे किसी को।
हम आंखों में ऐसी
नजर मांगते हैं।।
पड़े अगर मुसीबत न
झोली पसारें।
हम हाथों में ऐसा
हुनर मांगते हैं।।
पुकारे कोई दीन
अबला हमें गर।
घड़ी पल में पहुंचे वो
पर मांगते हैं।।
जो बेताब जुल्म और
सितम देखकर हो।
तड़पता हुआ वो
जिगर मांगते हैं।।
दुःखी या अनाथों की
सेवा हो जिससे।
प्रभु अपने घर ऐसा
जर मांगते हैं।।
मांगे भी अगर, सबके
बराबर मांगे।
इंसान नाइंसान से
बढ़कर मांगे।
इंसान मुकर्रर है यहाँ
तेरी हदूद।
दुःख पायेगा जब
हद से फिजूतर मांगे।










