प्रभु तेरे सिवा कौन है
प्रभु तेरे सिवा कौन है,
प्राणों के बचैया ।
रो रो पुकारती है आज,
भारती मैया ।। टेक ।।
गो भक्षकों की देश से,
सत्ता चली गई,
गो रक्षकों से हाय न,
विपदा टली गई ।
लो जा रहे कसाई आज,
हाय री दैया ।।१।।
रो रो …………..।।
हिन्दु हो मुसलमान,
पारसी या ईसाई,
तज भेद, भाव मैं तो दूध,
सबको पिलाई ।
फिर भी न बर्ने रक्षक,
मेरे कोई भैया ।।२।।
रो रो …………।।
हमको कटा के चाहते,
अन्न अधिक उगाना ।
गौ-वंश घटा चाहते,
आराम से खाना ।
किस विध हो सोचो देश की,
नैया के खिवैया ।।३।।
रो रो …….।।
गांधी की दुहाई को आज,
दे रहे सारे, गौ- रक्षा का
पथ गांधी के ही, भक्त विसारे ।
कहते हैं कुछ, करते है कुछ,
बातों के बनैया ।।४।।
रो रो………
हे! दीनबन्धु सुन लो,
देर ना करो।
गोपाल आके गाय के,
कष्ट को हारो ।
सुन ‘व्यास’ की विनय भी लो,
भक्तो की सुनैया ।।५।।
रो रो……..










