प्रभु पर जिसने ऐतबार किया
प्रभु पर जिसने ऐतबार किया,
खुशियों ने उससे प्यार किया
कृपा उस पर ईश्वर की रही
जिसने उत्तम व्यवहार किया
जिसने दिल की आवाज सुनी
उसको ही सही परवाज मिली
जीवन उसका महका चहका
भले दुनिया जरा नाराज मिली
उपकार में तन मन अर्पित कर
पुण्यों का सदा कारोबार किया
प्रभु पर जिसने ऐतबार किया,
खुशियों ने उससे प्यार किया
उलझन अड़चन से भरा है जग,
रङ्ग रूप अनोखे समाये है
दर्पण विवेक में सब दिखता,
वेद ज्ञान झरोखें बनायें है
जाने अन्तर सच झूँठ का हम
इंतजाम यह बारम्बार किया
प्रभु पर जिसने ऐतबार किया,
खुशियों ने उससे प्यार किया
साँसों की लड़ियाँ टूट रही,
निश्चय ही बिखर ये जाएगी
कर ले सुमिरन ‘हित’ सही समय
डूबी नैया तर जाएगी
प्रभु चरण पकड़ यदि बचना है
कितनों का व्यर्थ इन्तजार किया
प्रभु पर जिसने ऐतबार किया,
खुशियों ने उससे प्यार किया
कृपा उस पर ईश्वर की रही
जिसने उत्तम व्यवहार किया
प्रभु पर जिसने ऐतबार किया,
खुशियों ने उससे प्यार किया
रचनाकार :- युवा कवि श्री हितेन्द्र जी आर्य
स्वर :- पण्डित सुरिन्दर जी आर्य
परवाज़ = उड़ान










