उमर चली जाये न
(तर्ज-कभी राम बन के कभी शाम बन के चले आना)
- प्रभु नाम जप ले सुबह शाम जप ले
यूँ ही सारी उमर चली जाये न।
प्रभु नाम जप ले……….
१. जब से मानव का चोला पाया।
तूने ईश्वर कभी न ध्याया।
दिन गुज़ार कर के। बाज़ी हार कर के।
प्यारी प्यारी उमर चली जाये न।
प्रभु नाम जप ले………..
२. ओम् अक्षर हृदय में बसा ले।
उसकी महिमा का दीपक जला ले।
सच्चे नाम के बिना। अच्छे काम के बिना।
यह तुम्हारी उमर चली जाये न।
प्रभु नाम जप ले………..
३. रहता हर वक्त हैरान क्यों है।
बन्दे पल पल परेशान क्यों है।
चिन्ता छोड़ दे अभी। बन्धन तोड़ दे सभी।
बारी बारी उमर चली जाये न।
प्रभु नाम जप ले………..
४. उसके पथ के ‘पथिक’ ने पुकारा।
फिर न अवसर मिलेगा दोबारा ।
यह विचार कर ले। बेड़ा पार कर ले।
नर नारी उमर चली जाये न ।
प्रभु नाम जप ले………..










