प्रभु की लीला देखो

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प्रभु की लीला देखो

प्रभु की लीला देखो,
कितनी निराली सृष्टि को
रचे कैसे, वो शाक्तिशाली ।
जानते हैं वो तो सबकी कर्म कहानी ।
दिया हैं हमको जपने वेदों की वाणी ।।
सारे दुनिया का है वो मालिक,
हम जपे बार-बार उन्हीं को ।।० ।।

मन्त्र ध्वनी से गुंजे चारों दिशाएं,
खुशबु का झोका लेके आये हवाएं ।
सूर्य किरण से चमके सारे सितारें,
हम भी हैं जितने सारे उनके दुलारे ।।
सारे जीवों का है वो मालिक,
हम जपे बार-बार उन्हीं को ।।१।।

अन्तरा – बड़े-बड़े पर्वत जैसे,
बड़ी-बड़ी नदियां, बनाया सभी को
उसने, बात क्या ही कहना ।
है सुरज की प्रकाश जैसे,
है चान्दीनि रातें, प्रभु निराकार
को हम देख नहीं पाते ।
सुखं बहारों सी लगती है,
उनकी हर कहानियां, सारे
दुनिया का वो है मालिक,
हम जपे बार-बार उन्हीं को ।।२।।

घने-घने डालियों में हरे-हरे पतियां,
प्रभु को ही जपके वन्दे गाये उनकी
महिमा निला है आकाश जैसे,
बादल है धुआं-धुआं, करें प्रभु की
ही भक्ति दिनों दिन महिमा उनकी
कृपा से चलती है, ये सारी दुनिया ।
सभी प्राणियों का वो है मालिक,
हम जपे बार-बार उन्हीं को ।। ३ ।।
प्रभु की लीला देखो…।।