प्रभु के भजन बिन जीवन गंवाया रे।

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प्रभु के भजन बिन जीवन गंवाया रे। (तर्ज – चुप-चुप खड़े हो)

प्रभु के भजन बिन
जीवन गंवाया रे।
कुछ न कमाया तैने,
कुछ न कमाया रे।।
लाखों करोड़ों तैने रुपये कमाये,
सोने और चाँदी के ढेर लगाये।
साथ न जाये कौड़ी,
चंचल यह काया रे।।
कुछ०…..

पाँच-पाँच मंजिल के महल बनाये,
आनन्द लूटने को बाग लगाये।
जाना पड़ेगा छोड़, सन्तों ने गाया रे ।।
कुछ०……

गोरा खूब सुन्दर तन को बनाया,
माल-मसाले खाकर पुष्ट बनाया।
राख बनेगी इसकी,
माटी की काया रे ।।
कुछ०…..

बड़े-बड़े लोगों में नाम कमाया,
सारे शहर को ही अपना बनाया।
सुख के हैं साथी सारे,
व्यर्थ फूलाया रे ।।
कुछ……

धर्म कमाई सच्चा साथ चलेगी,
धर्म करेगा तब ही मुक्ति मिलेगी।
पुष्पमुनि ने मन को
सत्य ज्ञान सुनाया रे।।
कुछ न कमाया तैने,
कुछ न कमाया रे।।

अनाज के कण,समय के क्षण,
लगनशील मन,तीनो हैं महान धन