प्रभु भक्ति में मन को लगाइये
प्रभु भक्ति में मन को लगाइये,
वह सबका पालनहार है।
दुःख दूर करेगा परमात्मा,
सर्व सुखों का वह भण्डार है।।
खाली उसके द्वार से आये,
ऐसा कमी न हो सकता है।
परम पिता को भूल के प्राणी,
सुख से कमी न सो सकता है।।
सारी सृष्टि का वह आधार है,
उसकी महिमा का पाया न पार है।
दुःख दूर………
भाई बंधु, माल खजाना,
साथ तेरे न जायेगा।
धर्म ही एक अन्त का साथी,
काम तेरे जो आयेगा।।
शुभ कर्मों से होता बेड़ा पार है,
नाव पापी की डूबे मंझधार है।।
दुःख दूर………..
विषयों में फंसकर के बन्दे,
जीवन को बरबाद न कर।
नरतल चोला उत्तम है यह,
पाप न कर, अपराध न कर।।
नंद लाल प्रभु निराकार है,
नमस्कार उसे बारम्बार है।।
दुःख दूर………..
नानक नन्हे है रहो जेसे नन्हीं दूब।
घास-पात सब जरि गए, दूब खूब की खूब ।।










