प्रभो याद आये बहुत याद आये सबे जिन्दगी
स्वर :- वो जब याद आये
प्रभो याद आये बहुत
याद आये सबे जिन्दगी
के अन्धेरे में हमने उजालों
के दीपक जब से जलाये।।
दिल सम्भलने लगा मन
संवरने लगा नेक राहो पे
अब ये चलने लगा मेरे इस
भवन में खुशी छा गई है।
मस्ती में इतना हम मुस्कुराये ।।१।।
नफरतो के मकां अब तो
ढहने लगे हम सभी से यही
बस कहने लगे मोहब्बत की
दौलत से आंचल भरा है।
बरसने लगी है रब की दुआये।। २।।
चाहते मिट गई जब से दामन
मिला पतझड़ों में भी हंसता
सा सावन मिला तेरे ही
सुरेन्द्र सबेरे सबेरे परिदों
ने नग्में मीठे सुनाये ।। ३।।










