पीपल के पत्ते ऊपर तेरा ठोड़ ठिकाना है।
पीपल के पत्ते ऊपर
तेरा ठोड़ ठिकाना है।
क्या जाने किसी वत्ता
टूटकर मिट्टी में मिल जाना है।
ये काया तो भष्म बनेगी
आखिर इसका अन्त यही है।
अग्नि वायु जल सभी छोड़ दे
वेद में सच्ची बात कही है।
‘पथिक’ सिमरले ओ३म् नाम को
गर मीठा फल खाना है….।
पका हुआ खरबूजा
जैसे स्वयं छोड़ दे डाली को।
ऐसे हो तुम छोड़ के जाना
इस दुनियां मतवाली को।
मृत्यु का बन्धन कट जावे
अमृत पद को पाना है….।
उत्तम मध्यम अधम पाश को
परमेश्वर ढोला कर दे।
यम-नियम के परिपालन से
दामन में खुशियाँ भर दे।
हो जावे अपराध रहित नर
जीवन शुद्ध बनाना है….।
हंसना-गाना-मौज मनाना
खाना-पीना सोना है।
नियत समय तक इन सब से
सम्बन्ध सभी का होना है।
अन्तकाल में महाकाल में ही
हर हाल समाना है….।










