भक्ति
पावन प्रभात काल में,
ईश्वर भजन किया करो।
श्रद्धा भरी भावना,
भक्ति सुधा पिया करो।।1।।
बचना अगर है पापों से,
तीनो तरह के तापों से।
अन्तर्मुखी हो ओ३म का,
चिन्तन सदा किया करो।।2।।
पावन प्रभात काल में ईश्वर……..
यज्ञमयी सुभावना बने,
यही है साधना।
जो कुछ बने सुकर्म में,
तन-मन व धन दिया करो।।3।।
पावन प्रभात काल में ईश्वर…….
पीड़ पराई देखकर,
जो न पसीजे, नीच है।
दीन-दुःखी का दुःख घटे,
ऐसी कोई क्रिया करो।।4।।
पावन प्रभात काल में ईश्वर…….
कैसा कठोर काल हो,
डरो नहीं संघर्ष से।
जीवन की जटिलताओं में,
हँसते हुए जिया करो।।5।।
पावन प्रभात काल में ईश्वर…….
वैर विरोध व्यर्थ है,
हृदय की हीन भावना।
फटे दिलों के वस्त्र को,
स्नेह सहित सिया करो।।6।।
पावन प्रभात काल में ईश्वर…….
भौतिक भोग हेय है,
ध्येय प्रभु का ध्यान है।
‘पाल’ पवित्र भाव से,
आत्मप्रक्रिया करो।।7।।
पावन प्रभात काल में ईश्वर ……..










