पति ही अपनो महादेव

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पति ही अपनो महादेव

पति ही अपनो महादेव,
जतन करि हरे हरे
जतन करि पूजोरी।

भूत मसानी सैयद भुमिया
पति ही जाहर पीर, जिन्द खईस
मियाँ बलकारी पति ही है
महावीर, इसे ही सींचोरी।। पति ही ।।१

जीवन भर सुख-दुख का
साथी प्रिय पतिदेव तुम्हारा,
सर्वोपरि है धर्म ये बहिना
इष्टदेव निज प्यारा,
नहीं कोऊ दूजोरी।। पति ही।।२

इष्टदेव सुख दाता यही पति सौभाग्य
पति ही परम मित्र सिरताज,
बढ़ावे पति बिन शोक समाज,
जगत सब झूठोरी।। पति ही।।३