पति और पत्नी में जहाँ प्यार है,
पति और पत्नी में जहाँ प्यार है,
धरती पे स्वर्ग का वह द्वार है।।
स्वर्ग है दुःख का जहाँ अन्त है,
हरदम ही रहता वहाँ बसन्त है।
उस घर की बगिया में बहार है।।
धरती पे……….
जीवन का लक्ष जहाँ भलाई है,
खाते पुरुषार्थ की कमाई है।
रोगी ना कोई नर-नार है।।
धरती पे……
वृद्धों की सेवा प्रेम बच्चों से,
आंगन महके खुशियों के लच्छों से।
घर आये अतिथि का सतकर है।।
धरती पे…….
ऐसे परिवार “कर्मठ” थोड़े हैं,
गुण के अनुसार जिनके जोड़े हैं।
वरना तो दुखिया ये संसार है।।
धरती पे……










