पास मैं हूँ तेरे ढूंढे तू दूर।
पास मैं हूँ तेरे ढूंढे तू दूर।.
गलती है तेरी, मेरा क्या कसूर।। टेक ।।
साधन से सम्पन्न यह नर तन दिया।
स्वावलम्बी अरे मैंने तुझको किया ।।
कर्म कुछ ना करे दोष मुझ पै धरे।
तू जरूर गलती है तेरी।।1।।
कर न यह काम संकेत कर देता हूँ।।
दिल की धड़कन बढ़ा कर डर सीख
मेरी भली तू न माने है देता हूँ।।
छली गरूर गलती है तेरी।।2।।।
स्वास्थ्य प्रद पेय पदार्थ मैं तेरे लिये।
दुग्ध अन्न फल मेवे पैदा किये ।।
मद्य मांसादि खा खुद ही रोगी बना।।
बे सहूर गलती है तेरी।।3।।
अति मनोरम सरस भव्य दृश्यों सहित।
किया मैंने जगत प्रेमी तेरे अर्पित ।।
तैने नर्क कर दिया बेड़ागर्क कर दिया।
है हुजूर गलती है तेरी मेरा क्या कसूर ।।4।।










