परमात्मा को पाए वही
परमात्मा को पाए वही
हो जाए जो अन्तर्मुखी
उससे परे कोई नहीं
प्रभु का मिलन परागति
ढूँढे ठिकाने ईश्वर को पाने
ढूँढे से भी वह कहीं ना मिला
विरले ही जाने हृदय की गुफा में
देते हैं दर्शन वह परमपिता
आत्मा तो राजा – करे ना गुलामी
इन्द्रियों की और देह की
आत्मा रही प्रभु के प्रति
आत्मा बनी ईश्वर की हवि
परमात्मा को पाए वही
हो जाए जो अन्तर्मुखी
उससे परे कोई नहीं
प्रभु का मिलन परागति
मन्दिर यह मन का आसन हृदय का
ईश्वर के भावों से चित्रित हुआ
हृदय की गुफा में ईश्वर को पाने
योग आत्मा का ईश्वर से होता
पथिकृत हैं ईश्वर मार्ग सुझाते
आत्मा को देते नित जागृति
चित्रबर्हि आत्मा वही
प्रभु बिन जिसे ना सूझे कोई
परमात्मा को पाए वही
हो जाए जो अन्तर्मुखी
उससे परे कोई नहीं
प्रभु का मिलन परागति
अन्त: गुहा में प्रकाश को पाने
कर्म इन्द्रियाँ बने आकर सखा
प्रभु मन को हरते आनन्द भरते
इससे अधिक कोई पाएगा क्या ?
जन्मान्तरों बाद मिलती सफलता
तो आवागमन की न चिन्ता कोई
अद्भुत आनन्द – जागे स्वयं
जब ईश संग आत्मा मिली
परमात्मा को पाए वही
हो जाए जो अन्तर्मुखी
उससे परे कोई नहीं
प्रभु का मिलन परागति










