परहित करना उत्तम धरम है

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परहित करना उत्तम धरम है

परहित करना उत्तम धरम है,
परहित करना सर्वोच्च करम है।।
आत्म गहन ब्रह्म गहनतम है,
इनका मिलन तल गहनतम है।। टेक ।।

सुख बांटे सो पाए सुखम् है,
हर एक जीव से जुड़ा ब्रह्म है।।
आत्मा पंछी सांस तो पर है,
उड़न हेतु आकाश अनन्त है ।। १।।

छुओ जरा जो कुछ भीतर है,
भीतर से हर मनुज नरम है।।
कर्म भक्ति वहां दिव्य मिलन है,
जहां ज्ञान का परम मरम है ।। २ ।।

कोई पराया नहीं है जग में,
सब का नाम एक आदम है।
भापा का यह शाश्वत स्वर है,
परहित करना सरल मरम है।। ३ ।।