परम पिता से प्यार नहीं, शुद्ध रहा व्यवहार नहीं

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चेतावनी

परम पिता से प्यार नहीं,
शुद्ध रहा व्यवहार नहीं,
इसीलिए तो आज देख लो,
सुखी कोई परिवार नहीं। ।1।।

फल और फूल अन्न इत्यादि,
समय-समय पर देता है,
लेकिन अचरज ऐसा,
बदले में कुछ नहीं लेता है।।2
।।

करता है इनकार नहीं,
भेद-भाव तकरार नहीं,
ऐसे दानी का ओ बन्दे,
करता जरा विचार नहीं।।3।।
इसीलिए तो आज देख लो……

मानव चोले में नजाने,
कितने यंत्र लगाए हैं,
कीमत कोई आँक सका न,
ऐसे अमूल्य बनाए हैं।।4।।

कोई चीज बेकार नहीं,
पा सकता कोई पार नहीं,
ऐसे कारीगर का बन्दे,
माने तू उपकार नहीं। ।5।।

जलवायु और अग्नि का वह,
लेता नहीं सहारा है।
सर्दी गर्मी वर्षा का अति सुन्दर
चक्र चलाया है।।6।।

लगा नहीं दरबार नहीं,
कोई सिपाह सालार नहीं,
कर्मों का फल देवे सभी को,
रिश्वत की सरकार नहीं।।7।।
इसीलिए तो आज देख लो……

सूरज चाँद सितारों का तो,
बिजली घर नहीं बना हुआ,
पल भर को नहीं देते धोखा,
कहाँ कनैक्शन लगा हुआ।।8।।

खम्भा और कोई तार नहीं,
खड़ी कोई दीवार नहीं,
ऐसे शिल्पकार का करता,
ओ’ नरदेव’ विचार नहीं।।9।।