पलभर के लिए बंदे प्रभु से प्यार कर ले (तर्ज- पलभर के लिए कोई हमें…)
पलभर के लिए बंदे प्रभु से
प्यार कर ले, थोड़ा ही सही।
अपनी करनी पै टुक तू विचार
कर ले, थोड़ा ही सही।
छिपकर किया सारा ईश्वर ने देखा,
दिल पे खिंची तेरे पापों की रेखा,
पापों की रेखा बनी कष्टों की रेखा,
सारा चुकाना पड़ेगा – तुझे लेखा,
माफ होगा नहीं, तू एतवार कर ले।।१।।
भाग्यशाली जो नरतन ये पाया,
किया कुछ ना तो वृथा गंवाया,
अस्थिर नहीं है तेरी सुन्दर-सी काया,
ढलती रहती ज्यूं तरवर की छाया,
घर जाने को सामां तैयार कर ले।। २ ।।
मेरी-मेरी कह गंवाया तूने जीवन,
ले पकड़ ले प्यारे तू दाता का दामन,
वही दुःख हरेंगे वही साथ देंगे,
कर दे सर्वस्व अपना तू अर्पण,
‘राघव’ किश्ती पुरानी को पार कर ले।। ३ ।।










