पाखण्ड अंधविश्वास के कारण स्वर्ग यहां का नर्क हुआ।
पाखण्ड अंधविश्वास के कारण
स्वर्ग यहां का नर्क हुआ।
गुरुडम और चमत्कारों से
देश का बेड़ा गर्क हुआ॥ टेक ॥
साइंस गणित टैक्नोलॉजी से
युग आया परिवर्तन का।
फिर भी इस हिन्दू जाति के
भ्रम मिटता नहीं क्यों मनका॥
पत्थर के गणेश दूध पीते क्या
स्वांग नया पागलपन का।
अनपढ़ तो अनपढ़ हैं पड़े
लिखे मार्ग तलाशते बन्धन का॥
लक्ष भूल गये जीवन का,
जब ढोंगियों से सम्पर्क हुआ॥1॥
दास अविद्या के बनकर
विद्या की वृद्धि कर ना सके।
मूर्ख बटोर रहे कंकर
रत्नों से झोली भर ना सके ॥
अज्ञान की नोका में बैठे
इसलिए तो भव से तर ना सके।
गर्त्त में गिरते जाते निशदिन
जो करना था कर ना सके॥
जीते भी नहीं ये मरना सके,
जीवन युक्ति बेतर्क हुआ॥2॥
अंकगणित बीजगणित सत्य है
फलित फंसाने का धन्धा।
तांत्रिक चन्द्रा स्वामी राज्य
नेताओं को कर गया अन्धा॥
प्रधान मन्त्री तक की बुद्धि
ऊपर फेर गया रन्दा।
देश का द्रोही नीच धूर्त्त है
भ्रष्ट आचरण का गन्दा॥
लेते हैं चुनाओं में चन्दा,
शासन पर कुछ ना फर्क हुआ॥३॥
दास रूढ़ियों के बनकर
उन्नति के पथ से भटक रहे।
स्वतन्त्रता के मिलने पर भी
दार के ऊपर लटक रहे॥
युवती युवक अश्लीलता के
सागर में फंसकर अटक रहे।
अर्ध नग्न होकर के मद्य के
प्याले पीकर मटक रहे॥
कर्मठ बम ऊपर पटक रहे,
यह राष्ट्र सूखकर कर्क हुआ॥4॥










