पहले तन मन शुद्ध कर दूजे कुल परिवार
पहले तन मन शुद्ध कर,
दूजे कुल परिवार,
तीजे ग्राम सुधार ले,
बस हो गया देश सुधार।
कहना कुछ और करना कुछ,
अब छोड़ों यह तमाशा,
वही करो जिस काम की,
औरों से रखते हो आशा।,
बदल जायेगा पाशा,
सुधरेगा सारा संसार | |1 ||
सुबह का खोया हुआ शाम को,
लौट आये यदि घर,
खोये जाने वालो में समझों,
वह नर बेहतर, सम्भल जाये
ठोकर खाकर समझों अच्छे आसार । |2 ||
स्वयम् सुधार की करो प्रतिज्ञा,
अभी इसी घड़ी,
सभी समस्यायें सुलझेंगी,
छोटी और बड़ी,
आप पै आशा लिये खड़ी,
यह जनता बेशुम्मार।।3।।
कहना सुनना बहुत हो गया,
कुछ करके दिखला दो,
परमेश्वर की सृष्टि का,
करना उपभोग सिखा दो,
शोभाराम ‘प्रेमी’ समझा दो,
सबको हर प्रकार ।।4।।










