पढ़ो सत्यार्थप्रकाश को मिटै अन्धकार यह सारा।
पढ़ो सत्यार्थप्रकाश को
मिटै अन्धकार यह सारा।
सारे हैं सिद्धान्त इसी में,
देखो आद्योपान्त इसी में।
‘भूराराम’ नितान्त इसी में,
रख पक्के विश्वास को-
बन्धन यह काटन हारा ॥
पढ़ो………..।
महर्षि ने यह ग्रन्थ बनाया,
वेदों का भानु प्रकटाया।
दूध अरु पानी छान दिखाया,
रच चौदह समुल्लास को-
मूर्खता को फटकारा ॥ पढ़ो…!
सबके देखो धर्म इसी में,
सबके देखो कर्म इसी में।
सब ग्रन्थों का मर्म इसी में,
कर इसके अभ्यास को-मिल
जावे सुगम किनारा ॥
पढ़ो………।
जो हैं दिल के भ्रम तेरे ये,
जो हैं उलटे कर्म तेरे ये।
सारे होण्यां नरम तेरे ये,
मेट हृदय की प्यास को
अमृत की बह रही धारा ॥
पढ़ो……..।










