पढ़ो सत्यार्थप्रकाश को मिटै अन्धकार यह सारा।
पढ़ो सत्यार्थप्रकाश को
मिटै अन्धकार यह सारा।
१- महा ऋषि ने यह ग्रन्थ बनाया,
वेदों का भानु प्रगटाया।
दूध अरु पानी छान दिखाया,
रच चौदह समुल्लास को –
मूर्खता को फटकारा ।। पढ़ो….
२-सबके देखो धर्म इसी में,
सबके देखो कर्म इसी में।
सब ग्रन्थों का मर्म इसी में,
कर इसके अभ्यास को-
मिल जावे सुगम किनारा ।। पढ़ो….
३-जो हैं दिलके भ्रम
तिरेये जो हैं उलटे कर्म तेरे ये।
सारे होज्यां नरम तिरेये,
मेट हृदय की प्यास को –
मिल जावे सुगम किनारा ।। पढ़ो….
४-सारे हैं सिद्धान्त इसी में,
देखो आद्योपान्त इसी में।
भूराराम’ नितान्त इसी में,
रख पक्के विश्वास को –
बन्धन यह काटन हारा।। पढ़ो…..










