पा के सुन्दर खेलन,कर प्रभु का भजन
पा के सुन्दर खेलन,
कर प्रभु का भजन
दुनियां फानी का,
कोई भरोसा नहीं।
जो आया यहां, उसको
जाना पड़े जिन्दगानी का,
कोई भरोसा नहीं।।
- बालपन खेल और कूद
में खो गया फिर जवानी
का आसार आने लगा।
इस सुघड़ बेला में कर
कमाई भली नौजवानी
का कोई भरोसा नहीं।।
2.अरबों वाले गये,
खरबों वाले गये कितने
गोली व गोले रिसाले गये।
कितने राजा गये,
कितनी रानी गयीं राजधानी का,
कोई भरोसा नहीं।।
3.श्रेष्ठ जीवन बना,
कर सभी का भला तेरे जीवन में,
सुख-शान्ति आ जायेगी।
अगर करेगा भला,
तेरा होगा भला बदगुमानी का,
कोई भरोसा नहीं।।
4.खाली हाथों जहां से,
सिकन्दर गया सब खजाने की चाबी,
धरी रह गयी।
वैद्य लुकमान को भी,
कजा खा गयी लाभ-हानि का,
कोई भरोसा नहीं।।










