ओ देव दयानन्द, देख लिया तेरे कारण जन-जन को

0
43

ओ देव दयानन्द, देख लिया तेरे कारण जन-जन को

ओ देव दयानन्द,
देख लिया तेरे कारण
जन-जन को,
हम सबको मिला है ये नवजीवन ।
तुझे है सौ-सौ वंदन,
करें तेरा अभिनंदन ।। ओ देव….

हुआ अज्ञानता का दूर अंधेरा,
घर-घर ज्ञान के दीप जले
तेरे कारण ।। जन-जन को….

झाड़-झंखाड़ तूने जड़ से उखाड़ा,
बगिया में नए-2 फूल खिले
तेरे कारण।। जन-जन को…..

गैर की धमकियों से दबने वाले,
खतम हुए हैं सब वह सिलसिले
तेरे कारण।। जन-जन को…

हम एक फूंक से ही उड़ जाते थे,
‘पथिक’ तूफान से भी अब न हिलें
तेरे कारण।। – जन-जन को…