ओम् ओम् बोले रोम रोम बोले

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ओम् ओम् बोले (तर्ज-कभी राम बनके कभी शाम बनके)

ओम् ओम् बोले रोम रोम बोले
यही प्यारे प्रभु का बड़ा नाम है।
ओम् ओम् बोले………

उपनिषद् ओम् के गीत गा के,
सारी दुनियां को महिमा सुना के।
धुआंधार बोले सविस्तार बोले।
यही प्यारे प्रभु………..

योग दर्शन भी दर्शा रहा है,
ओम् का अर्थ समझा रहा है।
गुण अपार बोले हर प्रकार बोले।
यही प्यारे प्रभु………….

कृष्ण भगवान गीता में बोले,
ओम् अक्षर के सब भेद खोले।
ज़ोरदार बोले बेशुमार बोले।
यही प्यारे प्रभु…………

गुरु नानक जी धरती पे आये,
एक ओंकार के शब्द गाये।
लगातार बोले बार बार बोले,
यही प्यारे प्रभु………..

बोले ऋषिवर दयानन्द प्यारे,
ओम् में प्रभु के हैं नाम सारे ।
समझदार बोले कर विचार बोले।
यही प्यारे प्रभु………….

ऋषियों मुनियों को है ओम् प्यारा,
इसको जीवन में सबने उतारा।
पथिक प्यार बोले तार तार बोले।
यही प्यारे प्रभु…………….