ओम् ओम् बोल मनवा
(तर्ज – आजा इक वार जोगिया…)
- ओम् ओम् बोल मनवा । ओम् ओम् बोल मनवा ।
क्यों है डाँवाँ डोल मनवा। ओम् ओम् बोल मनवा।
ओम् ओम् बोल मन…….
१. देख लिया तू ने लाखों योनियों में घूम के।
मस्त मस्त बस्तियों की मस्तियों में झूम के।
सब है पोलम पोल मनवा । ओम् ओम् बोल मनवा …..
२. बड़ी मुश्किलों से ऐसा अवसर आया है।
बड़ा कीमती यह तूने नर तन पाया है।
हीरा अनमोल मनवा । ओम् ओम् बोल मनवा ……
३. आते जाते श्वास हीरे मोतियों की माला है।
इन्हीं से ही फैला तेरे मन में उजाला है।
मिट्टी में न रोल मनवा । ओम् ओम् बोल मनवा ……..
४. बात क्यों न आये तेरे अपने विचार में।
गठड़ी में लाल रखा ढूँढता बाज़ार में।
गठड़ी टटोल मनवा ओम् ओम् बोल मनवा …..
५. आलसीपने का तम्बू तान के तू सोया है।
नहीं जानता कि तेरा धन माल खोया है।
आँखें ज़रा खोल मनवा। ओम् ओम् बोल मनवा ……
६. बोल प्रभु नाम गूँजे रागनी दिशाओं में।
झूम झूम गा ले सच्चे प्यार की हवाओं में।
‘पथिक’ बाजे ढोल मनवा । ओम् ओम् बोल मनवा …..










