ओ३म् नाम प्यारा नाम गाये
ओ३म् नाम प्यारा नाम गाये
जा प्राणी बोल के प्राणी बोल के।
उसको मना ले प्रीति लगाले
अनमोल जीवन सफल बना ले।
१. जिसके जन से बुद्धि
विमल हो जाती है।
शंकाएं निर्मूल सकल हो जाती हैं।
प्रतिपल-पल आनन्द
आन्तरिक होता है।
जिसके जप से मन अति
हर्षित होता है…उसको मना ले
२. जो अनुपम ब्रह्माण्ड
की रचना करता है।
जो प्रियतम प्राणी के
सकल दुःख हरता है।
देश भक्त प्रभु भक्त ही
जिसको प्यारा है।
दुर्बल-दुखिया दीन का
वही सहारा है…….उसको मना ले
३. जिससे जगमग
ज्योतिमान नभमण्डल है।
जो अनुपम आनन्द
निष्कपट निश्चल है।
जीवों के कर्मों का
देता जो फल है।
निराकार निर्लेप निरंजन निर्मल है…
उसको मना ले
४. इधर-उधर-दर-बदर
भटकता क्यों नर है।
अणु-अणु, कण-कण में
व्यापक ईश्वर है।
‘बेगराज’ हर एक दिल
में प्रभु का घर है।
फिर किसका डर जब
रक्षक वो ईश्वर है……
उसको मना ले










