ओ३म् को छोड़,पत्थर का करें सम्मान जो।

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ओ३म् को छोड़, पत्थर का करें सम्मान जो।

ओ३म् को छोड़,
पत्थर का करें सम्मान जो।
खुद बना पत्थर के टुकड़ों को,
कहें भगवान् जो।
सिर झुका पत्थर से माँगे,
ऐसे हैं इन्सान जो।।1।।

इनसे अच्छे जानवर चूहे,
बिल्ली हैवान यह।
जो समझते हैं यह पत्थर,
हैं नहीं भगवान यह।।2।।

पूजा का माल सब खावें,
समझें बुत पाषाण यह।
बेधड़क उन पर चढ़ें,
मूत करें अपमान यह।।3।।

जानवर होते हुए भी,
इनकी अच्छी पहचान यह।
जड़ वस्तु के पूजकों से,
इनका अच्छा ज्ञान यह।।4।।

कितनी मूर्ख हो चुकी अब,
ऋषियों की सन्तान यह।
देख अवस्था इनकी ‘सेवक’,
हो रहा हैरान यह।।5।।

अगर आसमान वाले से आपके रिश्ते मजबूत हैं,
तो जमीन वाले, आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते।