ओ३म् की ध्वज के तले ।
ओ३म् की ध्वज के तले ।
सृष्टि यह क्रमशः चले ।।
मिलना बिछड़ना बनना बिगड़ना।
नियम यह कभी ना टले……..।।1।||
जीव प्रकृति संग, वृत्ति व्याहृति संग।
दुख-सुख के सांचे में ढले.
प्राणी संसार के, प्रेमी परिवार के।
सदस्य हैं बुरे या भले……….।।3।।










