ओ३म् की छाया तले

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ओ३म् की छाया तले

ओ३म् की छाया तले,
जीवन की जोत जले।
हरि ओम, हरि ओम,
हरि ओ३म् ।।

ओम् का नाम लेके,
ओम् का ध्यान करके।
जीवन सरस चले,
ओम की छाया तले ।।

न कोई अपना, न है पराया।
सबको लगाले गले,
जीवन की ज्योत जले।।

न कोई ऊँचा, न कोई नीचा।
सब में ही ब्रह्म रमे,
ओम् की छाया तले ।।

हृदय में प्रेम डोले,
मुख से मधुर बोले।
सत्य वचन तू कहे,
सत्य वचन तू कहे।।

इस जीवन का क्या है भरोसा।
पल में पंक्षी उड़े, पल में पंक्षी उड़े।।
न कोई बंधु न कोई बांधव।
स्वार्थ के सब हैं खड़े,
स्वार्थ के सब हैं खड़े।।

सूर्य जैसे जल को खींचता
और बरसाता है,
उसी तरह हमें द्रव्य लेना
और देना चाहिए।