ओऽम् की बाती,ज्ञान का तेल।

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ओऽम् की बाती,ज्ञान का तेल।

ओऽम् की बाती,
ज्ञान का तेल।
तेल से ज्योति जले अनमेल ।

फैली 5 फैली 5 फैली ऽ
ज्योति चहुंदिशि फैली ।। टेक ।।

क्या दिव्य प्रकाश है,
ब्रह्म मानव के साथ है।
मानव ही ना समझे तो
किसके वश की बात है?
ओऽम् जप ओऽम् जप ।। १ ।।

परहित का काम है,
धरम इसका नाम है।
जीवन में उतर आए,
विश्व ही सुखधाम है।

उन्नत उन्नत ।।२।।
महनत हरपल करना है,
जग को सुख से भरना है।
ज्ञान सत्य के साथी हैं,
ऊंचा हमको चढ़ना है।
उन्नत उन्नत ओऽम् जप ।। ३ ।।