ओम् जय जगदीश पिता

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ओम् जय जगदीश पिता

ओम् जय जगदीश पिता,
प्रभु जय जगदीश पिता।
विश्व विरंच विधाता,
जगत्राता सविता ॥ओं।।

शुद्ध बुद्धि से मन में,
तेरा ही वर्णन करें।
सब विधि छल बल तज के,
तेरी शरण पड़े ॥ ओं ॥

अनन्त अनादि अजन्मा,
अविचल अविनाशी ।
सत्य सनातन स्वामी,
शंकर सुख राशी ॥ओं।।

सेवकजन सुखदायक,
जननायक तुम हो।
शुभ सुख शान्ति सुमंगल,
वरदायक तुम हो ॥ ओं॥

मैं सेवक शरणागत,
तुम मेरे स्वामी।
हृदय पटल में प्रगटो,
प्रभु मेरे अन्तर्यामी ॥ ओं ॥

काम, क्रोध, मद, मोह, कपट,
छल, व्यापे नहीं मन में।
लगन लगे मम मन की,
गुण तेरे वर्णन की ॥ओं ॥

नित्य निरंजन निशदिन
तेरा ही जाप करें।
तव प्रताप से स्वामी,
तीनों ही ताप हरें ॥ ओं ॥

पतित उद्धारक तारण,
शरणागत तेरी।
भूले ना भटके भ्रम में,
निर्मल मति मेरी ॥ ओं ॥