ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् के जाप में बड़ा सुख है
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् के जाप में बड़ा सुख है
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् है शुद्ध स्वरूप रहता शाश्वत
ओ३म् गुरु मन्त्र और दु:ख नाशक
ओ३म् है कर्त्ता और विधाता है
उसका सिमरन नियम से करने हैं
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् के जाप में बड़ा सुख है
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
सच्चिदानन्द स्वरूप निराकार
उस अनुपम से ध्यान करते हैं
सृष्टि कर्त्ता है ओ३म् सर्वाधार
उसकी करुणा का पात्र बनते हैं
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् के जाप में बड़ा सुख है
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् की शरण में “ललित” आ जा
जिन्दगी फिर तेरी रहे ना रहे
सार्थक जिन्दगी को करना है
कर ले चिन्तन की खुद सुध न रहे
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् के जाप में बड़ा सुख है
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् जपने में लगा चित्त है
ओ३म् जपने में लगा चित्त है










