ओ३म् को ना जपुं तो जी घबराता है
ओ३म् को ना
जपुं तो जी घबराता है,
उनको जपके मन को
मेरा चैन आता है।…२
ये कैसा रिस्ता है कैसा
नाता है प्रभुको जपके
मन को मेरा चैन आता है ।।० ।।
अन्तरा – तुम मेरी माता,
तुम मेरे पिता तुम मेरा
बन्धु तुम मेरी सखा ।।
सारा संसार का एक
हो तुम ईश्वर जपुं मैं
तुझको जी जान देकर…२
ये तेरी लिला ही मुझको भाता है ।
जपके तुझको मन
को मेरा चैन आता है।
हे प्रभु तेरा ही कारीगरी,
रचे हो दुनिया को
न्यारी-न्यारी पहाड़,
पर्वत, नदी वो नालियां,
ये सारी जितनी तेरा ही महिमा… २
ये तेरा रचना ही सबसे प्यारा है।
जपके तुझको मन
को मेरा चैन आता है ।।










