ओ दुनिया वालो यह देश हमारा
ओ दुनिया वालो यह देश हमारा
जग से न्यारा, आंख का तारा,
हम सबको प्राणों से प्यारा।। टके।
आदि सृष्टि की रचना
भी तो यहीं हुई है।
सभ्यता सँस्कृति भी
विश्व में यहां से गई है।।
शिष्य रहा कभी विश्व समूचा,
इसलिए भारत सबसे ऊंचा।
देश कहाता, इसी देश की
पुण्यभूमि पर जन्म हमारा ।।1।।
चारों तरफ जलनिधि और
हिमगिरि का घेरा।
प्रकृति ने सौन्दर्य सब यहीं बखेरा।।
प्रिय बसन्त हेमन्त मनोरम,
वर्षा शिशिर शीत और ग्रीष्म।
छः ऋतुओं का, एक वर्ष में
मिल जाता है आनन्द सारा ।।2।।
व्यास पतञजलि कपिल
कणाद जैमिनि गौतम।
ऋषि दयानन्द योगी
कृष्ण श्रीराम पुरूषोत्तम ।।
उच्चकोटि के सन्त महात्मा,
योद्धा वीर धीर-धर्मात्मा।
यहां पैदा हुए, जिनका
एक दिन सकल विश्व में
चमका सितारा ।।3।।
सोना चांदी हीरे मोती
रज कण-कण में।
भरे पड़े हैं मेरे पारस
मणि वतन में।।
‘प्रेमी इसकी रक्षा करे हम,
जिये इसी के लिए मरे हम।
सत्य वचन है हमारा नारा,
हम, सबने मिल आज उच्चारा। |4||










